Category Archives: मेरी कविता

धूप


शहर में /

धूप के गहने /

कोई और चुरा लेता है /

गगनचुम्बी /

ईमारत की ओर से झांकती /

एक टुकड़ा धूप /

घर के दरवाजे पर /

दस्तक देती है /

खिडकी से अंदर आने की /

कोशिश करती है /

असफल /

शहर में /

धूप के बिछोने  /

कोई ओर बिछा लेता है /

चाहरदीवारी में /

कैद हुई धूप /

टुकडो में बंट गई /

किसी ओर के हिस्से की /

धूप /

किसी ओर के घर  /

रुक गई /

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